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Highlight the differences in the approach of Subhash Chandra Bose and Mahatma Gandhi in the struggle for freedom.

Subhash Chandra Bose and Mahatma Gandhi were both prominent leaders in the Indian freedom struggle, but they had differing approaches and ideologies.

  1. Ideological Differences:
    • Gandhi believed in non-violent resistance, known as Satyagraha, which involved civil disobedience, boycotts, and peaceful protests.
    • Bose, on the other hand, believed in more aggressive tactics, including armed resistance if necessary. He famously said, “Give me blood and I will give you freedom.”
  2. Methods of Resistance:
    • Gandhi’s methods focused on moral and spiritual principles, emphasizing the power of truth and non-violence to bring about change.
    • Bose, however, advocated for direct action and mobilization of the masses, including forming the Indian National Army (INA) to fight alongside the Axis powers against British rule during World War II.
  3. Approach to Leadership:
    • Gandhi was a charismatic leader who emphasized decentralized leadership and believed in empowering the masses to bring about change from the grassroots level.
    • Bose, though also charismatic, believed in strong, centralized leadership and was willing to take more authoritarian measures to achieve his goals.
  4. Relations with the British:
    • Gandhi preferred negotiation and dialogue with the British authorities, believing in appealing to their conscience and sense of justice.
    • Bose saw the British as the primary obstacle to Indian independence and believed in confronting them directly through whatever means necessary.
  5. International Relations:
    • Gandhi focused on gaining international sympathy and support for India’s cause through non-violence and moral persuasion.
    • Bose sought support from countries like Japan and Germany, even forming alliances with them during World War II, viewing them as potential allies in India’s struggle for independence.
  6. Vision for Independent India:
    • Gandhi envisioned an independent India based on principles of non-violence, tolerance, and inclusivity, where Hindus and Muslims could coexist peacefully.
    • Bose, while also advocating for a free and united India, had a more nationalist and militant vision, emphasizing self-reliance and a strong, unified nation.

In summary, while both Subhash Chandra Bose and Mahatma Gandhi shared the goal of liberating India from British rule, they differed significantly in their approaches, with Gandhi advocating non-violence and moral persuasion, and Bose advocating more militant and confrontational tactics.

स्वतंत्रता संग्राम में सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी के दृष्टिकोण में अंतर पर प्रकाश डालिए।

सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी दोनों भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख नेता थे, लेकिन उनके दृष्टिकोण और विचारधाराएं अलग-अलग थीं।

  1. वैचारिक मतभेद:

गांधी अहिंसक प्रतिरोध में विश्वास करते थे, जिसे सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है, जिसमें सविनय अवज्ञा, बहिष्कार और शांतिपूर्ण विरोध शामिल थे।

दूसरी ओर, बोस अधिक आक्रामक रणनीति में विश्वास करते थे, जिसमें यदि आवश्यक हो तो सशस्त्र प्रतिरोध भी शामिल था। उन्होंने प्रसिद्ध रूप से कहा, “मुझे खून दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा।”

2. प्रतिरोध के तरीके:

गांधीजी के तरीके नैतिक और आध्यात्मिक सिद्धांतों पर केंद्रित थे, जिसमें परिवर्तन लाने के लिए सत्य और अहिंसा की शक्ति पर जोर दिया गया था।

हालाँकि, बोस ने प्रत्यक्ष कार्रवाई और जनता की लामबंदी की वकालत की, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ धुरी शक्तियों के साथ लड़ने के लिए भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) का गठन भी शामिल था।

3. नेतृत्व के प्रति दृष्टिकोण:

गांधीजी एक करिश्माई नेता थे, जिन्होंने विकेंद्रीकृत नेतृत्व पर जोर दिया और जमीनी स्तर से बदलाव लाने के लिए जनता को सशक्त बनाने में विश्वास किया।

बोस, हालांकि करिश्माई भी थे, मजबूत, केंद्रीकृत नेतृत्व में विश्वास करते थे और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए और अधिक सत्तावादी कदम उठाने को तैयार थे।

4. अंग्रेजों से संबंध:

गांधीजी ने ब्रिटिश अधिकारियों के साथ बातचीत और बातचीत को प्राथमिकता दी, उनकी अंतरात्मा और न्याय की भावना को ध्यान में रखते हुए।

बोस ने अंग्रेजों को भारतीय स्वतंत्रता के लिए प्राथमिक बाधा के रूप में देखा और किसी भी आवश्यक माध्यम से उनका सीधे मुकाबला करने में विश्वास किया।

5. अंतरराष्ट्रीय संबंध:

गांधी ने अहिंसा और नैतिक अनुनय के माध्यम से भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहानुभूति और समर्थन हासिल करने पर ध्यान केंद्रित किया।

बोस ने जापान और जर्मनी जैसे देशों से समर्थन मांगा, यहां तक ​​कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके साथ गठबंधन भी बनाया, उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम में संभावित सहयोगियों के रूप में देखा।

6. स्वतंत्र भारत के लिए दृष्टिकोण:

गांधी ने अहिंसा, सहिष्णुता और समावेशिता के सिद्धांतों पर आधारित एक स्वतंत्र भारत की कल्पना की, जहां हिंदू और मुस्लिम शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रह सकें।

बोस, एक स्वतंत्र और एकजुट भारत की वकालत करते हुए भी, अधिक राष्ट्रवादी और उग्रवादी दृष्टिकोण रखते थे, आत्मनिर्भरता और एक मजबूत, एकीकृत राष्ट्र पर जोर देते थे।

संक्षेप में, जबकि सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी दोनों ने भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने का लक्ष्य साझा किया था, वे अपने दृष्टिकोण में काफी भिन्न थे, गांधी अहिंसा और नैतिक अनुनय की वकालत करते थे, और बोस अधिक उग्रवादी और टकरावपूर्ण रणनीति की वकालत करते थे।

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